गुरुवार, 23 अप्रैल 2009

बाबूजी जरा सम्भलना बडे धोके हे इस भवसागर में ,भगवान जी ने कहा तुम्हारी रक्षा में करूंगा ,तुम विवेक से स्दबुधी द्वारा विचार जरुर कर लेना ,भवसागर से पार लगने को किसी नोका की जरूरत होगी या तेरना आता हो,तेराक जो पार लगगया वो वापिस इस लोक में नही आया करता ,अगर तेरना नही आता तो डूबना तय,या प्रभु इछा से कोई लहर आवे जो उढा कर ख़ुद ही पार लगदे ,क्या वोह लहर परमात्मा के अतिरिक्त कोई और हो सकती हे ?शायद हाँ या ना ,या पता नही ,जरा सम्भल के चलना होगा ,छोटी सीभुल बडी सी दुर्घटना ,फिर सब कुछ लुटा के होश आया तो कया आया ,शायद कोई गुरु नही वो तो यहीं हे अगर पार गया होता तो इधर नही होता ,यह जो पार लगाने का वादा कर रहा हे कोई धोखा तो नही ?सच क्या हुआ ईश्वर हेना ,अब भवसागर के जहाज भी देखते हे , भगवान ने कहा अच्छे कर्मों के फल के अनुसार प्राणी मनुष्य योनी में आता हे ,हमने बुरे कर्म तो किए नही जो इस मनुष्य योनी में जहाज का आरामदायक सफर न कर सकें जहाज पर बडते हे ,कोई जहाज समाज वालों का हे कोई मिशन वालों का कोई किसी संस्था का बडी भीड़ चडी हुई हे ,इतना भार नजाने कब डूब जाए भवसागर में आया तो अकेला था तो में भीड़ के साथ क्यों जाऊ ?इनको पहले जा ने दू मेतोअकेला अपने प्रभु की नोका का इंतजार करलू इसी में भलाई हे , भवसागर में पैर पैर पर धोखा हे बाबु जी जरा सम्भलना सावधानी से किया कर्म या जिस धर्म में हुआ हो जन्म ,उसी के कर्मों को kr मनुष्य भवसागर से पार लग जाता हे ऐसा शस्त्रों का कथन हे ,किसी की राय किसी का मशविरा किसी का सुझाव व्यर्थ ही हे क्यों की एक शराबी दुसरे कोसमझावे की शराब मत पिया करो और ख़ुद रोज ही पीता हो ,ऐसे लोग भवसागर में पैर पैर पर मिलते हे ,सभी ने अपने-अपने धर्म बना रखे हें ,सभी गुरु बने फरते हें ,ज्ञान में जीरो ,प्रचार में हीरो ,कुछ के चिठे सामने आए कुछ आने बाकी हे ,बेशर्मी थोक के भाव ,एक बार की घटना हे ,इसी तरह के पहुचे धर्म गुरु जी से मेरी मुलाकाट हो गयी (शेष)०००मुझ से उन्हों ने कहां पुत्र तुम सनातन का परचम झुकने मत देना ,बोल बड़े प्य्यारे लगे ,मेरे ही सामने कुछ महिलाओं से चरण दबवाने लगे मेने कहा गुरु जी सनातन धर्म आप को यह आगया नही देता की पराई ओरत से चरण स्पर्श करवाए ,या पराई ओरत की छाया अपने पर पड़ने दे ,मुझ को डांटते हुए बोले मुर्ख प्राणी गुरु की निंदा ,अपमान ,करने वाला अपने ७ जन्म नरकों में दाल लेता हे ,मेने सोचा नर्क चला जावे या नरकों में भेजने वाला गुरु ही त्याग दिया जावे

2 टिप्‍पणियां:

mudar ने कहा…

chal akela kaphila khud bn jae ga

gita ने कहा…

क्या बात हे ,जान कर ख़ुशी हुई कि कलयुग में भी सतयुगी सोच वाले हें |सनातन की ध्वजा सदा इसी तरह लहराते रहो इसी को सात्विक विचार कहते हें

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