रविवार, 6 दिसंबर 2009

मानपुर घाट के। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को जोड़ने वाले आगरा-मुंबई सड़क मार्ग के बीच स्थित इस घाट को शापित माना जाता है। इस रास्ते से रोज गुजरने वाले वाहन चालकों का कहना है कि घाट में अतृप्त आत्माएँ भटकती रहती हैं, जिसके कारण दुर्घटनाएँ होती हैं।






यहाँ पहुँचते ही हमें लगा कि घाट के मोड़ काफी घुमावदार और खतरनाक हैं। कई जगह अंधे मोड़ हैं। कुछ ही दूरी तय करने पर हमें नजर आया भेरूबाबा का मंदिर। हमने देखा कि यहाँ से गुजरने वाला लगभग हर वाहन चालक मंदिर के सामने रुककर बाबा के सामने सिर झुकाकर नमन कर रहा था।






हमने पूजा-अर्चना कर चुके ट्रक चालक पप्पू मालवीय से बातचीत करना शुरू की। पप्पू मालवीय ने बताया कि वह पिछले कई सालों से इसी रूट पर ट्रक चला रहा है। उसने यहाँ कई हादसे देखे हैं। पप्पू भेरूबाबा का अनन्य भक्त है। पप्पू का कहना है कि इस घाट में आत्माएँ भटकती रहती हैं, लेकिन भेरूबाबा के आशीर्वाद से उन्हें कभी किसी हादसे का सामना नहीं करना पड़ा।






यहाँ पहुँचते ही हमें लगा कि घाट के मोड़ काफी घुमावदार और खतरनाक हैं। कई जगह अंधे मोड़ हैं। कुछ ही दूरी तय करने पर हमें नजर आया भेरूबाबा का मंदिर। हमने देखा यहाँ से गुजरने वाला लगभग हर वाहन चालक मंदिर के सामने रुक, बाबा के सामने सिर झुका नमन कर रहा है























घाट पर जगह-जगह चेतावनी से भरे साइन बोर्ड लगे हैं। इनमें भेरूघाट को खतरनाक घाट बताते हुए ब्रेक चेक करने और सचेत होकर वाहन चलाने के निर्देश दिए हुए हैं।






इस घाट के वाहन चालकों के साथ सफर करते हुए हमने यह महसूस किया कि कई वाहन चालक इन खतरनाक रास्तों पर भी अपने वाहनों की रफ्तार पर काबू नहीं रखते। भेरूबाबा के एक अन्य भक्त ट्रक चालक विष्णुप्रसाद गोस्वामी अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर बताते हैं कि यह मंदिर सालों पहले से यहाँ स्थापित है।


















हमारे जो भी साथी बाबा के सामने सिर झुकाकर जाते हैं, वे पूरे रास्ते सुरक्षित रहते हैं। इनका अनादर करने वालों का अहित होता है।






लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी ऐसा ही सोचें। इस मंदिर में आने वाले अनेक लोग ऐसे भी हैं, जो भूत-प्रेत के अस्तित्व को नहीं मानते, लेकिन मंदिर में श्रद्धा से सिर झुकाते हैं। इस बातचीत के बाद जब हम मानपुर घाट से लौट रहे थे तो हमें घाट के किनारे एक ट्रक पलटा हुआ दिखा। ट्रक ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई थी। हादसे की जाँच कर रही पुलिस टीम का कहना था यहाँ अकसर ऐसा होता है।






मानपुर घाट के मोड़ हैं ही इतने खतरनाक कि जरा-सी चूक हादसे को आमंत्रित कर देती है। इसलिए घाट से गुजरते हुए सचेत रहना जरूरी है। आप इस संबंध में क्या सोचते हैं? हमें बताइएगा।
आपको अंधविश्वास का एक बेहद घिनौना रूप दिखा रहे हैं, जिसके कारण 11 लोगों की मौत हो गई। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं जबलपुर के कथित सरोता वाले बाबा की।





ये बाबा सुपारी काटने वाले सरोते से लोगों की आँखों की बीमारी ठीक करने का दावा करते थे। अंधश्रद्धा की गिरफ्त में फँसे भोले-भाले लोग बाबा के दावे पर विश्वास करके अपनी लाचारी लेकर उनके दर पर चले आते थे।












बाबा का असली नाम ईश्वरसिंह राजपूत है। चूँकि वे सरोते से इलाज करते थे, इसलिए आम लोग उन्हें सरोता बाबा के नाम से पहचानते हैं। इसके अलावा उन्हें सर्जन बाबा जैसे उपनामों से भी संबोधित किया जाता था। सरोता बाबा आँखों के इलाज के अलावा एड्स और कैंसर के इलाज का भी दम भरते थे, इसलिए लोगों का ताँता लगा रहता था।



इनके इलाज करने का तरीका बेहद अजीब होता था। ये मरीज के मुँह पर कंबल ढँककर मरीज की आँखों में सरोते का एक हिस्सा डालकर इलाज करते थे। इन महाशय का दावा था कि जिस व्यक्ति ने पहले ही डॉक्टर से इलाज करवा लिया है या फिर उसकी आँखों का ऑपरेशन हो चुका है, तो उसके ठीक होने की गुंजाइश कम है, अन्यथा फायदा शर्तिया होगा।



उनकी इन बातों को उनके सहयोगियों ने बुंदेलखंड-छतरपुर जैसे अपेक्षाकृत पिछड़ी जगहों पर फैला दिया था, जिसके कारण उनके दर पर लोगों की खासी भीड़ लगने लगी। फिर बाबा ने सरोते से लकड़ी काटकर देना भी शुरू कर दिया। वे दावा करते थे कि यह लकड़ी आपको हर रोग से दूर रखेगी।












ये बाबा पिछले कई सालों से इसी तरह से इलाज करते चले आ रहे थे। उनका दावा था कि वे रोज डेढ़ घंटे अपने कुलदेवता नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करते हैं। इस पूजा में वे जो जल चढ़ाते हैं, उसे पीने से व्यक्ति की हर बीमारी दूर हो जाती है। बाबा द्वारा फैलाई गई इन बातों पर भरोसा करके हजारों लोग गुरुवार के दिन बाबा से पवित्र जल लेने और सरोते से इलाज कराने भर्रा गाँव आते थे।
 
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धीरे-धीरे बाबा की ख्याति फैलने लगी और उनके पास हजारों की तादाद में लोग आने लगे। बढ़ती भीड़ गाँव वालों की परेशानी का सबब बनी और उन्होंने बाबा को यहाँ से चले जाने के लिए कहा। बाबा ने घोषणा कर दी कि अब वे गाँव से जा रहे हैं और इस गुरुवार को वे आखिरी बार इलाज करेंगे।







बाबा की घोषणा को उनके साथियों ने पूरे क्षेत्र में फैला दिया। फिर क्या था, भर्रा गाँव में लोगों का ताँता लग गया। सैकड़ों की संख्या में लगने वाली भीड़ हजारों में बदल गई। उस पर बाबा के अनुयायियों ने भीड़ को संभालने की कुछ व्यवस्था भी नहीं की थी। इतनी भीड़ देखकर बाबा भी कुछ परेशान हुए और उन्होंने लोगों को पानी पिलाने की जगह पानी फेंकना शुरू कर दिया।












फिर क्या था, कथित पवित्र पानी को पीने के लिए भीड़ में होड़ मच गई। इससे भगदड़ शुरू हुई और एक-एक करके ग्यारह लोग मौत की आगोश में समा गए और अनेक घायल हो गए। इस दुर्घटना के बाद पुलिस ने बाबा को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार बाबा के पूरे सुर बदल गए। वे अपनी चमत्कारिक शक्तियों को नकारने लगे।



वे कहने लगे कि ये तो लोगों की श्रद्धा है, अन्यथा वे एड्स और कैंसर जैसी बीमारियों के बारे में ठीक से जानते भी नहीं। जो सरोते वाले बाबा पहले दावा कर रहे थे कि हर तरह की लाइलाज बीमारी को ठीक कर सकते हैं, अब वे अपने ही दावे से पूरी तरह मुकर रहे थे। अब आप ही सोचिए कि किस तरह यह बाबा भोले-भाले लोगों को ठगते होंगे।












इसके साथ ही इस दुर्घटना के बाद जब हमने गाँव वालों से बातचीत की तो उन्होंने हमें बताया कि यह बाबा इलाज अपने खेत में बने आश्रम में करते थे। वे इलाज के नाम पर तो एक पैसा नहीं लेते थे, लेकिन उनके ही चेलों ने उनके खेत में दुकानें लगा रखी थीं। इन दुकानों में वे पूजा का सामान दोगुने दामों में बेचते थे। फिर किसी की इच्छा हो तो बाबा को चढ़ावा चढ़ा जाए।



इस तरह लोगों के अंधविश्वास के चलते बाबा का धंधा खासा फल-फूल रहा था। इस हादसे के बाद बाबा को जेल हुई, लेकिन कुछ ही दिनों में बाबा खुली हवा में साँस ले रहे थे और उनके अनुयायी फिर उनके दर पर पहुँचने लगे थे।












इस हादसे को देखने के बाद हमारी अपने पाठकों से यही गुजारिश है कि वे इस तरह के बाबाओं के चंगुल में न फँसें। हम मानते हैं कि हमारे पाठक सुधी लोग हैं, वे आस्था और अंधविश्वास के बीच की लकीर जानते हैं, इसलिए हम आपके सामने हर बार एक नई भ्रांति, कहानी, मान्यता लाते रहेंगे, जो आपको समाज में फैल रही आस्था और अंधविश्वास दोनों से रूबरू कराएगी।( चेला )

शनिवार, 10 अक्तूबर 2009

शुक्रवार, 21 अगस्त 2009


शुक्रवार, 24 जुलाई 2009

न्याय जरा सम्भलके


सविनय निवेदन आज को सुधोरो भविष्य ख़ुद ही सुधर जाए गा आज का लिया फेसला कल के भविष्य का कर्म बनने वाला हे सतर्क रहें

बुधवार, 22 जुलाई 2009


मंगलवार, 21 जुलाई 2009

सोमवार, 6 जुलाई 2009

जरा संभल के बाबा

बाबा जरा सम्भल के क्यों की भारत में सनातन के महत्व को ऋषि मुनियों ने जाना पुरे का पुरा समझा अगर वो दूसरो को न समझा पाते तो आजके समाज में राम देव जेसे आसाराम सरीखे धर्म गुरु पैदा ही नही होते स्म्लेंगिकता की बहस में कम से कम धर्म गुरु हिसा ही नही लेते जेसे राम देव आज कल टी.वी पर छाए हुए हें ,ऊखल में सर दे जुटे खा रहे हें ऐसे घटिया लोग सिर्फ सनातन धर्म के अपमान हेतु ही जन्मलेतेऔर मर जाते हें श्री मन १००८ जगत गुरु शंकराचारिए ने तो मुह खोला नही बाबा उनसे भी उपर के सनातन धर्म के ठेकेदार बन बेठे समाज को इश्वर के दिखाए मार्ग पर यदि चलने की शिक्षा इन के द्वारा दी गई होती तो आज कोई न्याएयाले सनातन धर्म को अपमानित न करता भारत सरकार जो सभी धर्मों को आदर देने की बात कहती हे सनातन धर्म में बदती कुरीतियों को बडावा दे कभी भी सनातन धर्म को अपमानित न होने देती सनातन धर्म के अनुसार सूर्य के समान सभी काम (उदय-अस्त)अपने समयानुसार ही होते आज महात्मा गाँधी के कहे बोलों (ईशवर आल्हा तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान -हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सब आपस में भाई - भाई )कहने की पुनः नोबत ही न आई होती क्यों की हिंदू -मुस्लिम -सिख -इसाई चारों धर्म उसी परमेश्वर के द्वारा बनाए गये सनातन धर्म हें और चारों धर्म एक सी ही शिक्षा देते हे आज भी चारों धर्म गे -लिसबिन को सनातन के ठेके दार बन हो हला कर रहे हें परन्तु सरकार नये धर्मो को सुरक्षा दे सनातन धर्म को ही दबाने के प्रयास में दिखती हे जब -जब धर्म की हानि होती हे तब्- sनातं पुरूष अवतरित हो पुनः सनातन धर्म की स्थापना कर ते हें राम देव नाम होने से राम तो हो नही जाता जोकुछ हो रहा हे रामजी की इछा अनुसार ही हो रहा हे लोग सनातन धर्म को मिटा कर नित्य नये-नये धर्मों की स्थापना सनातन पुरूष राम के देश में कर रहे हें और सरकारें न्याए उन्ही के पक्छ में करती जा रही हें यह भूल कर की १०० सुनार की १ लुहारकी इस लिए जरा सम्भल के बाबा

गुरुवार, 23 अप्रैल 2009

बाबूजी जरा सम्भलना बडे धोके हे इस भवसागर में ,भगवान जी ने कहा तुम्हारी रक्षा में करूंगा ,तुम विवेक से स्दबुधी द्वारा विचार जरुर कर लेना ,भवसागर से पार लगने को किसी नोका की जरूरत होगी या तेरना आता हो,तेराक जो पार लगगया वो वापिस इस लोक में नही आया करता ,अगर तेरना नही आता तो डूबना तय,या प्रभु इछा से कोई लहर आवे जो उढा कर ख़ुद ही पार लगदे ,क्या वोह लहर परमात्मा के अतिरिक्त कोई और हो सकती हे ?शायद हाँ या ना ,या पता नही ,जरा सम्भल के चलना होगा ,छोटी सीभुल बडी सी दुर्घटना ,फिर सब कुछ लुटा के होश आया तो कया आया ,शायद कोई गुरु नही वो तो यहीं हे अगर पार गया होता तो इधर नही होता ,यह जो पार लगाने का वादा कर रहा हे कोई धोखा तो नही ?सच क्या हुआ ईश्वर हेना ,अब भवसागर के जहाज भी देखते हे , भगवान ने कहा अच्छे कर्मों के फल के अनुसार प्राणी मनुष्य योनी में आता हे ,हमने बुरे कर्म तो किए नही जो इस मनुष्य योनी में जहाज का आरामदायक सफर न कर सकें जहाज पर बडते हे ,कोई जहाज समाज वालों का हे कोई मिशन वालों का कोई किसी संस्था का बडी भीड़ चडी हुई हे ,इतना भार नजाने कब डूब जाए भवसागर में आया तो अकेला था तो में भीड़ के साथ क्यों जाऊ ?इनको पहले जा ने दू मेतोअकेला अपने प्रभु की नोका का इंतजार करलू इसी में भलाई हे , भवसागर में पैर पैर पर धोखा हे बाबु जी जरा सम्भलना सावधानी से किया कर्म या जिस धर्म में हुआ हो जन्म ,उसी के कर्मों को kr मनुष्य भवसागर से पार लग जाता हे ऐसा शस्त्रों का कथन हे ,किसी की राय किसी का मशविरा किसी का सुझाव व्यर्थ ही हे क्यों की एक शराबी दुसरे कोसमझावे की शराब मत पिया करो और ख़ुद रोज ही पीता हो ,ऐसे लोग भवसागर में पैर पैर पर मिलते हे ,सभी ने अपने-अपने धर्म बना रखे हें ,सभी गुरु बने फरते हें ,ज्ञान में जीरो ,प्रचार में हीरो ,कुछ के चिठे सामने आए कुछ आने बाकी हे ,बेशर्मी थोक के भाव ,एक बार की घटना हे ,इसी तरह के पहुचे धर्म गुरु जी से मेरी मुलाकाट हो गयी (शेष)०००मुझ से उन्हों ने कहां पुत्र तुम सनातन का परचम झुकने मत देना ,बोल बड़े प्य्यारे लगे ,मेरे ही सामने कुछ महिलाओं से चरण दबवाने लगे मेने कहा गुरु जी सनातन धर्म आप को यह आगया नही देता की पराई ओरत से चरण स्पर्श करवाए ,या पराई ओरत की छाया अपने पर पड़ने दे ,मुझ को डांटते हुए बोले मुर्ख प्राणी गुरु की निंदा ,अपमान ,करने वाला अपने ७ जन्म नरकों में दाल लेता हे ,मेने सोचा नर्क चला जावे या नरकों में भेजने वाला गुरु ही त्याग दिया जावे

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